महाविद्यालय का लोकार्पण
शिक्षा के प्रयास को लोक जागरण एवं पुनर्निर्माण का सशक्त माध्यम स्वीकार करते हुए युगपुरुष ब्रह्मलीन महन्त दिग्विजयनाथ जी महाराज ने शैक्षिक दृष्टि से अत्यन्त पिछड़े पूर्वी उत्तर प्रदेश के
केन्द्र एवं अपनी कर्मस्थली गोरखपुर में प्राथमिक शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक की शिक्षण संस्थाओं को संचालित करने हेतु महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की 1932 ई. में स्थापना
कर शिक्षा के क्षेत्र में अपनी अविस्मरणीय भूमिका की नींव रखी। महाराणा प्रताप महाविद्यालय, जंगल धूसड़, गोरखपुर महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद् द्वारा स्थापित शिक्षण संस्थानों
की कड़ी का एक महत्वपूर्ण पड़ाव था, जिसने अपने प्रथम सत्र से ही उच्चशिक्षा की अग्रणी शिक्षण संस्थाओं में अपना स्थान बना लिया। गोरखपुर-पिपराइच मार्ग पर महानगर से सटे
इस महाविद्यालय की नींव 29 जून, 2004 ई. को तत्कालीन गोरक्षपीठाधीश्वर परमपूज्य महन्त अवेद्यनाथ जी महाराज के कर कमलों द्वारा रखी गयी एवं इस महाविद्यालय का उद्द्घाटन
29 जून 2005 ई. को पूर्व मानव संसाधन विकास मंत्री डॉ. मुरली मनोहर जोशी द्वारा किया गया।
उद्देश्य :
गुणवत्ता युक्त एवं मूल्य आधारित शिक्षा व्यवस्था के एक मानक केन्द्र के रूप में विकसित किये जाने की योजना से स्थापित महाराणा प्रताप महाविद्यालय प्रथम सत्र से ही छात्र/छात्राओं को
पुस्तकीय ज्ञान के साथ-साथ संस्कार युक्त जीवन एवं भारतीय मूल्यों के प्रति आग्रही बनाने का भगीरथ प्रयास प्रारम्भ कर चुका है। हम इस बात का ध्यान रखकर इस संस्था का वातावरण
सृजित कर रहे हैं कि यहाँ अध्ययन करने वाला युवा अपने कैरियर के साथ-साथ देश, समाज एवं परिवार के प्रति अपनी जवाबदेही महसूस करें।
महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद् द्वारा संचालित,महाराणा प्रताप महाविद्यालय, जंगल धूसड़, गोरखपुर के प्रबंधक गोरक्ष पीठाधीश्वर महंत योगी आदित्यनाथ जी महाराज, माननीय मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश,
की स्पष्ट दृष्टि है कि इस संस्था से अध्ययन करने वाला युवा आधुनिक ज्ञान विज्ञान तथा कला की कालोचित शिक्षा ग्रहण करने के साथ-साथ राष्ट्र और समाज के प्रति सहज निष्ठा और
श्रद्धा का पाठ पड़े। श्रेष्ठ भारतीय जीवन दर्शन तथा संस्कृति और संस्कारों का वह अनुगामी बने। पूज्य महाराज जी का कहना है की प्रगति और परंपरा राष्ट्रीय सामाजिक विकास के दो
पहिए हैं। ऐसे में अत्याधुनिक संसाधनों, सूचना एवं संचार माध्यमों के उपयोग के साथ अध्यापन तथा भारतीय जीवन दर्शन के प्रति श्रद्धा भाव पैदा करना इस महाविद्यालय का मिशन है।
पूज्य महाराज जी के सपनों के महाविद्यालय को मूर्त रूप देने के लिए यह महाविद्यालय अपनी स्थापना काल से ही कृत संकल्पित है।
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